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उत्तराखंड का प्रकरण उत्तर प्रदेश में खड़ा कर सकता है बड़ा भूचाल

 

 उत्तराखंड में जिस तरह से हरीश रावत को फ्लोर टेस्ट में भारी सफलता मिली है उसने उत्तर प्रदेश की सियासत को भी हिलाकर रख दिया है। उत्तराखंड में हरीश रावत को मायावती ने भी अपने दो विधायकों का समर्थन देकर यूपी में भारतीय जनता पार्टी की मुसीबत को बढ़ा दिया है। पूरे उत्तर प्रदेश में घूमी सपा की "साइकिल नंबर 2017" यूपी में महंगे पड़ सकते हैं यूके के दाग जिस तरह से उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी हुई है वह उत्तर प्रदेश की सियासत में भी पार्टी के लिए मुश्किल बन सकती है। जिस तरह से उत्तराखंड में भाजपा ने दावा किया था कि उनके पास सरकार बनाने के लिए नंबर है उसने मंगलवार को फ्लोर टेस्ट में दम तोड़ दिया। इस सियासी हार के बाद भाजपा के आला नेताओं को अपनी हार को छिपाने के लिए तर्क भी नहीं मिल रहे हैं। यूपी में कांग्रेस के लिए महागठबंधन की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं पीके भाजपा के खिलाफ रूझान का फायदा उठा सकती है कांग्रेस ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में जहां कुछ महीनों बाद चुनाव होने हैं वहां भाजपा ने इतनी फजीहत क्यूं करायी। लोगों के बीच जिस तरह भाजपा के खिलाफ रूझान बढा है उसका फायदा उठाने से कांग्रेस बिल्कुल नहीं चूकेगी। कांग्रेस के आला नेताओं की सुगबुगाहट को मानें तो हरीश रावत जल्द ही चुनाव के लिए जा सकते हैं। केंद्र सरकार की भी साख गिरी उत्तराखंड में भाजपा के दावे की पोल खुलने के बाद पार्टी पर सरकार को गिराने का षड़यंत्र रचने आरोप लग रहा है। यही नहीं केंद्र सरकार का राज्य सरकार में दखल का भी आरोप लग रहा है ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस तरह से उत्तराखंड में अपनी कोई साख की कीमत उन्हें यूपी में नहीं चुकानी पड़े। मायावती की सियासत अबूझ पहेली हालांकि मायावती ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही कह दिया था कि वह सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए कांग्रेस को अपना समर्थन दे रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में उन्होंने कांग्रेस या किसी भी दल के साथ गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है।मायावती का कांग्रेस को समर्थन देने के बाद इस बात की भी संभावना ने जन्म लिया है कि यूपी में वह आने वाले समय में अगर ऐसी कोई परिस्थिति बनती है कि गठबंधन हो तो वह कांग्रेस के साथ जा सकती है। भाजपा के बड़े रणनीतिकार हुए फेल उत्तराखंड प्रकरण से भाजपा को कई चीजें सीखने की जरूरत है। पहली कि जिस तरह से पार्टी के आला नेताओं को प्रदेश की सियासत की गलत जानकारी दी गयी उसकी विवेचना की जाए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि प्रदेश में केंद्रीय नेता ही रणनीति बना रहे थे और इन्ही नेताओं पर उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी है।

 

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