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शहडोल में आदिवासी अधिकारियों की कारगुजारी पर पर्दा डालने की कवायद

 

रवि अवस्थी,भोपाल। एक ओर राज्य का सत्तारुढ़ दल शहडोल लोकसभा उपचुनाव जीतने के लिए रात दिन एक कर रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी जिले में पदस्थ अधिकारियों की कारगुजारियां वहां आम जन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। खास बात यह कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश को भी नजरअंदाज कर जिले के दागी अधिकारी,कर्मचारियों को बचाने का काम मुख्यालय के कु छ अधिकारी कर रहे हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार, शहडोल संभाग में पदस्थ आदिवासी विकास विभाग के  प्रभारी सहायक आयुक्त सुधाशुं वर्मा व लेखापाल केके सिंह बघेल की भ्रष्ट  कार्यशैली से जिले में आदिवासी उपयोजना व विभागीय कल्याणकारी योजनाओं  की गतिविधियां ठप्प हैं। इसी तरह आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए खेल व अन्य सामग्रियों की खरीदी में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसकी शिकायत करने पर एक महिला शिक्षिका ने उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप भी प्रभारी सहायक आयुक्त पर लगाए थे। करीब सात करोड़ रुपए से अधिक की खरीदी में गड़बड़ी व अन्य शिकायतों को  देखते हुए विभाग के निवर्तमान आयुक्त शोभित जैन ने स्वयं शहडोल पहुंच कर मामले की जांच की व प्रभारी सहायक आयुक्त सुधांशु वर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए उसे निलंबित करने के आदेश दिए थे। इस पर अब तक अमल नहीं हुआ। बताया जाता है कि गत ३० अगस्त को  उनका तबादला होते ही इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस मामले में विभाग के एक उपसंचालक की भूमिका संदिग्ध है। फर्जी आदेश जारी कर पलटा सरकार का आदेश शहडोल संभाग कार्यालय में जारी धांधली को देखते हुए राज्य शासन ने गत दिनों वहां के लेखापाल केके सिंह का तबादला कर सागर पदस्थ किया गया था,लेकिन लेखापाल ने एक फर्जी आदेश जारी कर अपनी पदस्थापना पुन: शहडोल में ही कर ली। खास बात यह है,यह मामला संज्ञान में होते हुए भी प्रभारी सहायक आयुक्त ने लेखापाल सिंह को पुन: अपने कार्यालय में ज्वाइन करवा लिया। बताया जाता है कि लेखापाल ने अपने बेटे के नाम से एक चिटफंड कंपनी भी जिले में खोल ली।इसमें कई लोग ठगी का शिकार हुए। इस मामले में जिला पुलिस द्वारा अपराधिक मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में भी पेश कर दिया। इन तमाम कारनामों के बाद भी दागी कर्मचारी,अधिकारी के जिले में पदस्थ रहने व  इनका निलंबन नहीं होने से वहां के आदिवासियों में आक्रोश व्याप्त है। 

   --- निवर्तमान आयुक्त शोभित जैन ने जांच की थी। निलंबन से पूर्व शहडोल के प्रभारी सहायक आयुक्त का पक्ष जानने के लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इसमें १५ दिन की मोहलत दी गई है। जहां तक लेखापाल के खिलाफ कार्रवाई की बात तो यह कार्य जिला कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में है।                                                                                           प्रभाकर ,उप संचालक आदिवासी विकास विभाग भोपाल ​

 

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