Tuesday, September 29, 2020 | होम | सम्पर्क करें | आपके सुझाव| हिन्दी मैग्जीन |
Bookmark and Share
समाचार
राष्ट्रीय
अन्तरराष्ट्रीय
सम्पादकीय
राजनीति
कारोबार
अपराध
खेल खिलाडी
मनोरंजन
साक्षात्कार
राज्य
मध्यप्रदेश
छत्तीसगढ
उत्तर प्रदेश
राजस्थान
गुजरात
दिल्ली
हरियाणा
बिहार
महाराष्ट्र
फोटो गैलेरी
Photo Gallery
अन्य
बॉलीवुड
शिक्षा
स्वास्थ्य
समाज
बाजार
ज्योतिष
धर्मं
महिला
युवा
बाल जगत
विशेष
जन आवाज
जानिये अपने विधायक को
जानिये अपने सांसद को
आरकाइव
एडमिन
ई - मेल
शिक्षा को सस्ता बनाने क्या निजी विद्यालयों पर अंकुश जरूरी है?
Yes   : 65 %
No     : 26 %
Can't : 9 %
Are you satisfied with your intranet system ?
पोषण आहार में निजी कंपनी की भूमिका नहीं होगी, प्रदेश को पूरी तरह कुपोषण मुक्त करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: कमलनाथ

 

भोपाल सोमवार 17 फरवरी 2020. पोषण आहार के उत्पादन और सप्लाई में निजी कंपनियों या ठेकेदारों की भागीदारी की संभावनाओं को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को पूरी तरह कुपोषण मुक्त करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वह एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के तहत टेक-होम राशन (पोषण आहार) के उत्पादन और आपूर्ति में निजी कंपनियों और ठेकेदारों को कोई भूमिका नहीं देगी।  
मुख्यमंत्री ने रविवार को जारी बयान में कहा कि बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ किशोरी बालिकाओं के लिए टेक-होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति में एमपी एग्रो को कैबिनेट के निर्णय के साथ ही स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जा चुका है कि किसी भी स्वरूप में किसी निजी कंपनी और ठेकेदार की कोई भूमिका निर्धारित न की जाए। सरकार पोषण आहार के उत्पादन और आपूर्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और मप्र हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के तारतम्य में नीति और व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कैबिनेट का आदेश मान्य होगा
इधर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि सामान्यत: यह परंपरा रही है कि कैबिनेट के निर्णय मुख्य सचिव से विभागों को लिखित संप्रेषण होने के बाद ही आदेश जारी होता है। यहां ऐसे निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना आदेश जारी हुआ। सबसे पहला आदेश किसी भी विभाग को नहीं भेजा गया। दिसंबर में मेरे कार्यभार संभालने के बाद से ही निजी कंपनी को पोषण आहार सप्लाई का आदेश बंद हैं। कैबिनेट को लेकर जो भी आदेश था, उसे ही जारी किया गया।
तीन अफसर तीन आदेश : भास्कर ने किया था खुलासा
 प्रदेश में हर माह 12 हजार टन पोषण आहार का उत्पादन किया जाता है। सरकार इस पर सालाना करीब 950 करोड़  रुपए इसपर खर्च करती है।  कारोबार का फायदा सिर्फ निजी कंपनियां उठाती हैं।  ‘दैनिक भास्कर’ ने रविवार के अंक में पोषण आहार सप्लाई को लेकर निजी कंपनियों की दोबारा एंट्री की राह खोलने वाले उन आदेशों का खुलासा किया, जो 27 नवंबर की कैबिनेट बैठक के बाद निकले थे। ये वो तीन आदेश थे, जिसमें निजी कंपनियों पर पाबंदी लगाने और फिर अंतिम आदेश में पाबंदी लगाने वाले बिंदू को हटाने का जिक्र था।  
कैबिनेट के फैसले को बाद में बदला जाए तो सभी मंत्रियों को इस्तीफा दे देना चाहिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पोषण आहार के विषय में कैबिनेट के बाद में जो निर्णय हुआ है, उस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट के निर्णय के पूर्व एसीएस अनुरूप गौरी सिंह ने कंडिका 11 में स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी निजी संस्था या ठेकेदार की भूमिका नहीं होगी। मुख्य सचिव ने कैसे कैबिनेट के निर्णय की उस कंडिका को विलोपित कर नई चिट्ठी जारी कर दी? इस सच को जनता के सामने लाना चाहिए।  

हैरान करने वाली बात है कि वित्त और महिला बाल विकास विभाग की नकारात्मक टिप्पणी के बाद भी कैबिनेट के निर्णय को बाद में बदला गया। एेसी कैबिनेट को तो इस्तीफा दे देना चाहिए। यदि महिला स्व सहायता समूह को सक्षम बनाने के लिए नए प्लांट स्थापित किए गए। हाईकोर्ट में हलफनामा भी सरकार ने दिया था तो यह निजी कंपनियों का कौन सा दबाव था कि मुख्य सचिव ने इस निर्णय को बदल दिया। एक आईएएस अधिकारी को नौकरी छोड़नी पड़ी। मुख्यमंत्री इसका जवाब दें। शिवराज सिंह ने सवाल उठाया कि क्या यह हाईकोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने का कुटिल प्रयास नहीं है?

 

Hindi e-Paper
PUBLI CPOINT
PUBLICPOINT
More e-Papers ...
Important Links
You can Advertisment here
Bhopal Weather


Usage Statistics Generated by Webalizer Version 2.01

E-mail : contactus@publicpointnews.com, publicpointindia@gmail.com
Copyright © 2007-2015 Public Point News, All Rights Reserved.